बिहार / झारखंडराज्य

मानव तस्करी पर बिहार पुलिस का बड़ा अभियान: अप्रैल में शुरू होगा ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’

पटना.

मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार और बाल श्रम जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ बिहार पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन के सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डीजीपी विनय कुमार ने पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इन मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अगर कोई बच्चा गायब हो जाता है और तीन महीने तक बरामद नहीं होता, तो मामला काफी जटिल हो जाता है। ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने की जरूरत है। डीजीपी ने पुलिसकर्मियों से कहा कि गुमशुदगी के मामलों को केवल औपचारिकता न समझें, बल्कि उसे अपनी जिम्मेदारी मानते हुए कार्रवाई करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर आपका खुद का बच्चा गुम हो जाए तो कैसा महसूस होगा, उसी संवेदनशीलता के साथ हर मामले को देखें। उन्होंने कहा कि समय पर कार्रवाई से बच्चों को जल्द खोजने की संभावना बढ़ जाती है। गुमशुदा बच्चों की तलाश में तेजी लाने और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए पुलिसकर्मियों को सतर्क और सक्रिय रहने की जरूरत है।

2025 में 506 केस, 1487 पीड़ितों को कराया गया मुक्त
डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 में मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार और बाल श्रम से जुड़े कुल 506 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 1487 पीड़ितों को शोषण से मुक्त कराया। साथ ही 437 मानव तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है। उन्होंने कहा कि इन अपराधों से निपटने के लिए पुलिस विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए विशेष इकाइयों का गठन और मानक कार्य प्रणाली भी तय की गई है।

सभी जिलों और हवाई अड्डों पर बनी विशेष इकाई
राज्य में मानव तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी जिलों में जिलास्तरीय मानव व्यापार निरोध इकाई (डीएल-एएचटीयू) का गठन किया गया है। इसके अलावा पुलिस और रेलवे जिलों समेत कुल 44 जिलों में यह इकाई कार्यरत है। पटना, गया और दरभंगा हवाई अड्डों पर भी एएचटीयू का गठन किया गया है, जबकि पूर्णिया हवाई अड्डे पर इसकी स्थापना की प्रक्रिया चल रही है। डीजीपी ने बताया कि इन इकाइयों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

एसओपी और मार्गदर्शिका के पालन पर जोर
मानव तस्करी से जुड़े मामलों में पुलिस को मार्गदर्शन देने के लिए दो मानक कार्य प्रणाली (एसओपी) तैयार की गई हैं। इसके साथ ही मानव व्यापार निरोध इकाई के प्रभारी निरीक्षकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी निर्धारण किया गया है। गुमशुदा बच्चों के मामलों की जांच और उद्भेदन के लिए भी विशेष मार्गदर्शिका जारी की गई है। डीजीपी ने कहा कि इन दिशानिर्देशों का पालन करते हुए मामलों का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित करना चाहिए।

1 से 20 अप्रैल तक चलेगा ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’
कार्यशाला के दौरान डीजीपी ने घोषणा की कि मानव तस्करी के खिलाफ 1 से 20 अप्रैल तक ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत पुलिस और अन्य एजेंसियां मिलकर कार्रवाई करेंगी। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में एनडीआरएफ के सेवानिवृत्त महानिदेशक डॉ. पी.एम. नायर ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर एडीजी (कमजोर वर्ग) डॉ. अमित कुमार जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button