
चंडीगढ़
मोबाइल पर सुनाई देने वाली परिचित ‘टूं-टूं’ नोटिफिकेशन की आवाज अब पंजाब में महज एक अलर्ट नहीं रह गई है। यह हजारों सोशल मीडिया रीलों की पहचान बन चुकी है, जिनमें पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना का जश्न मनाया जा रहा है। गांवों के आंगनों से लेकर शहरों की चहल-पहल तक महिलाएं गुनगुना रही हैं, नृत्य कर रही हैं, हास्य-व्यंग्य कर रही हैं और इस योजना से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रही हैं। उन्होंने एक कल्याणकारी योजना को राज्य के सबसे अनोखे डिजिटल ट्रेंड में बदल दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 1 जुलाई को मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना शुरू की थी।
सोशल मीडिया पर रील्स की होड़
आमतौर पर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा नीति घोषणाओं, बजट आवंटन, लाभार्थियों की संख्या और आधिकारिक प्रचार अभियानों तक ही सीमित रहती है। बहुत कम ऐसा होता है कि स्वयं लाभार्थी ही किसी योजना के सबसे बड़े प्रचारक बन जाएं। मावां धियां सत्कार योजना ने इस परंपरा को बदल दिया है। पूरे पंजाब में महिलाएं इस योजना से प्रेरित हास्य रीलें, डांस वीडियो, लिप-सिंक प्रस्तुतियां और रचनात्मक सोशल मीडिया पोस्ट तैयार कर रही हैं। उन्होंने इस योजना को जमीनी स्तर पर एक सोशल मीडिया आंदोलन का रूप दे दिया है।
महिला व्यक्त कर रही हैं अपनी खुशी
इस ट्रेंड की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्वाभाविक (ऑर्गेनिक) है। इसे आगे बढ़ाने के लिए न तो किसी सेलिब्रिटी का सहारा लिया गया है और न ही किसी पेड इन्फ्लुएंसर का। इसके बजाय लाभार्थी महिलाएं स्वयं ट्रेंडिंग ऑडियो, लोकप्रिय रील फॉर्मेट और रोजमर्रा के हास्य के माध्यम से अपनी खुशी अपनी स्थानीय बोली में व्यक्त कर रही हैं, जिससे इस ट्रेंड को एक अलग पंजाबी रंग मिला है। ये वीडियो दोस्तों और परिवारों के बीच तेजी से साझा किए जा रहे हैं और अब ‘टूं-टूं ‘ की आवाज घरों, गलियों और बाजारों में गूंजने लगी है।
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पुरुषों की सामने आई प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर छाए एक लोकप्रिय गीत की शुरुआत इन चर्चित पंक्तियों से होती है। 'टूं -टूं बजे… टूं-टूं बजे…' एक अन्य लोकप्रिय गीत मजाकिया अंदाज में कल्पना करता है कि पैसे आने के बाद खरीदारी कैसी होगी। 'देखना लिफाफों में सूट आएंगे मित्रा, जब टूं-टूं होगी…' इस ट्रेंड ने पुरुषों को भी हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देने के लिए प्रेरित किया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक रैप में वे मजाकिया अंदाज में पूछते हैं कि लाभ केवल महिलाओं को ही क्यों मिल रहा है। 'सीएम मान को मेरा सीधा-सा संदेश पहुंचा दो, पुरुषों के खाते में भी 500 रुपये डाल दो। सारा पैसा सिर्फ बीबियों पर ही मत लगा दो, हमें भी थोड़ा-बहुत ‘टूं-टूं ’ सुना दो।”
डिजिटल पर छाई सीएम मान की योजना
मावां धियां का यह अनुभव पंजाब की उस पुरानी परंपरा को भी दर्शाता है, जिसमें सामाजिक परिवर्तन को संगीत, हास्य और कहानी कहने की कला के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस परंपरा को एक नया मंच प्रदान किया है। लोकप्रिय संस्कृति और व्यक्तिगत अनुभवों के मेल से महिलाओं ने एक कल्याणकारी योजना को एक जीवंत ऑनलाइन आंदोलन में बदल दिया है, जो आर्थिक सहायता का जश्न गर्व, रचनात्मकता और आशावाद के साथ मना रहा है।
मावां धियां सत्कार योजना की चर्चा
जैसे-जैसे सरकारें नागरिकों से अधिक सार्थक तरीके से जुड़ने के नए रास्ते तलाश रही हैं, मावां धियां सत्कार योजना एक महत्वपूर्ण सीख प्रस्तुत करती है। सबसे प्रभावशाली संवाद अक्सर विज्ञापन एजेंसियों या आधिकारिक प्रचार अभियानों से नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज़ से जन्म लेता है, जिनके जीवन पर किसी नीति का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। पंजाब में लाभार्थियों ने एक कल्याणकारी योजना को जन-चर्चा में बदल दिया है। एक ऐसा संवाद , जो सरकारी नारों के बजाय वास्तविक आवाजों, साझा अनुभवों और ‘टूं -टूं ‘ की परिचित धुन के माध्यम से फैल रहा है।



