उत्तराखंडराज्य

उत्तराखंड में मिशन-60 प्लस की तैयारी, कांग्रेस के गढ़ों में रात बिताएंगे भाजपा के दिग्गज

हल्द्वानी
उत्तराखंड में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की चुनावी दिशा और प्राथमिकताओं को साफ कर दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों ने संगठन और सरकार के सामने खड़ी चुनौतियों पर मंथन किया।

योजना के तहत अगले महीने से पार्टी के शीर्ष नेता, केंद्रीय पदाधिकारी और मंत्री जहां कांग्रेस के विधायक हैं वहां पर किसी गांव का चयन कर रात्रि प्रवास करेंगे। इस दौरान नेता केवल औपचारिक जनसभाएं ही नहीं करेंगे, बल्कि सीधे ग्रामीणों और शक्ति केंद्र स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित करेंगे।

पिछले चुनाव में 10 सीटों का नुकसान
बैठक के केंद्र में मिशन-2027 और 60 प्लस का लक्ष्य ही रहा। भाजपा के सामने अब अगले छह महीने में उन कमजोर कड़ियों को मजबूत करने की चुनौती है, जहां 2022 में पार्टी को झटका लगा था। 2017 में 57 सीट जीतने वाली भाजपा 2022 में 47 सीट पर सिमट गई थी। कांग्रेस 19 सीटों पर सीमित रही। भाजपा के लिए 60 प्लस का लक्ष्य मौजूदा आंकड़े से 13 सीट की छलांग मांगता है। यही वजह है कि हल्द्वानी की कार्यसमिति को सत्ता की उपलब्धियों की समीक्षा के साथ चुनावी भूगोल को दोबारा साधने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

तराई में बढ़त के बिना लक्ष्य हासिल करना होगा मुश्किल
हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की 20 विधानसभा सीटें भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। 2022 में दोनों जिलों में पार्टी सिर्फ सात सीट जीत सकी थी। लिहाजा किसान, सिख, दलित, मुस्लिम, व्यापारी और प्रवासी मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाना मिशन-60 प्लस की अनिवार्य शर्त होगी। सरकारी और रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने, गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों पर कार्रवाई को भाजपा कानून का राज और सुशासन के रूप में पेश कर सकती है।

10 इम्तिहान
1. 60 प्लस मिशन

2. तराई की वापसी

3. पहाड़ का भरोसा

4. युवा कनेक्ट

5. शुद्धीकरण विवाद

6. वनभूलपुरा प्रकरण

7. सख्त फैसलों का नैरेटिव

8. सामाजिक समीकरण

9. टिकट और भीतरघात

शुद्धीकरण-वनभूलपुरा मुद्दे होंगे कसौटी
रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित शुद्धीकरण का विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कांग्रेस इसे दलित सम्मान और सामाजिक समरसता से जोड़ रही है। भाजपा के लिए यहां चुनौती राजनीतिक बयानबाजी को बढ़ाने के बजाय जांच और कानून की प्रक्रिया पर जोर देने की होगी। हल्द्वानी में यह मुद्दा स्थानीय चुनावी विमर्श को प्रभावित कर सकता है। वहीं, वनभूलपुरा रेलवे भूमि प्रकरण भी अहम है। भाजपा को कानून, विकास और मानवीय सरोकार, तीनों के बीच संतुलन साधना होगा।

पहाड़ में विकास का रिपोर्ट कार्ड निर्णायक
पहाड़ की सीटों पर पलायन, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क-कनेक्टिविटी के सवाल भाजपा के लिए चुनौती रहेंगे। पर्यटन, होमस्टे, बागवानी, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कामों को परिणामों से जोड़ना होगा। पहाड़ में रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का असर चुनावी धारणा तय करेगा।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button