
गरुड़.
साल 1952 में भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत गरुड़ आए और यहां फावड़े से उन्होंने कई स्थानों पर विकास कार्यों की इबारत लिखी। तब पं. पंत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उनके कार्य आज भी धरोहर के रूप में सहेजे गए हैं और उनका स्मरण दिलाते हैं।
कौसानी से गरुड़ की ओर आते हुए पं. पंत का काफिला अचानक दर्शानी में रुक गया। उन्होंने हाथ में फावड़ा लिया और भेटा नहर के निर्माण की शुरुआत की। यहां उन्होंने विद्यालय की नींव भी रखी।आज भेटा नहर जीर्ण-शीर्ण हालत में है। इस धरोहर को सिंचाई विभाग नहीं संभाल पाया।
अंतिम सांसें गिन रहा
राजकीय प्राथमिक विद्यालय दर्शानी भी आज अंतिम सांसें गिन रहा है। यहां छात्र संख्या लगातार घटते जा रही है। पं. पंत इसके बाद गड़सेर गांव पहुंचे। यहां उन्होंने तत्कालीन अल्मोड़ा जिले के पहले विकासखंड गरुड़ का शिलान्यास किया। वर्तमान में गरुड़ विकासखंड वृहद रूप ले चुका है। अब यहां पुराने भवन का जीर्णोद्धार कर नया भवन बना दिया गया है। इसको आज भी लोग पं. पंत की धरोहर के रूप में देखते हैं। सरकार ने नए भवन में रंगरोगन कर इसका बखूबी संरक्षण किया है। साल 2022 में यहां नए लुक में विकासखंड सभागार का निर्माण किया गया। उस दौर के बुजुर्ग आज भी पं. पंत के विकास कार्यों को याद करते हैं।
कुमाउनी में बोले थे भाबर में जमीन दिनु
कुमाउनी में भाषण देते हुए पं. पंत ने लोगों से कहा – ' हिटो तुम लोगों कै भाबर में जमीन दिनु। भाबर में बसि जाओ। अर्थात आप लोगों को भाबर में जमीन देते हैं, वहीं बस जाओ। तब लोगों ने जवाब दिया था- ' नाई हारि भाबर में भौत मच्छर लागनी। अर्थात, नहीं तो भाबर में बहुत मच्छर लगते हैं। ' आज पहाड़ में बढ़ते जंगली जानवरों के आतंक से आजिज आ चुके लोग कहते हैं, यदि उस समय भाबर में बस गए होते तो आज वहां आराम से खेती करते।



