
देहरादून
राष्ट्रवाद की मजबूत ओपनिंग, विकास के मोदी मॉडल का पावर-प्ले और डबल इंजन धामी सरकार की शानदार पारी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इन तीन बिंदुओं को मिलाकर पार्टी के लिए उत्तराखंड में सत्ता की हैट्रिक बनाने की रणनीति तैयार की है।
भाजपा की ‘कप्तानी’ संभालने के बाद तीसरी बार उत्तराखंड आए नवीन ने इस दफा पार्टी की रणनीति को रूप देने के लिए हल्द्वानी को खास वजह से चुना। रामलीला मैदान में दस अगस्त को हुए कथित शुद्धीकरण कार्यक्रम को आधार बनाते हुए उन्होंने सियासी फील्डिंग की रूपरेखा तय की। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखे बाउंसर फेंकते हुए साफ कर दिया कि भाजपा, पार्टी लाइन पर खेलने के साथ सामाजिक समरसता को भी मजबूत हथियार बनाएगी।
गुरुवार को लालकुआं में एससी वर्ग से आने वाले भाजपा के बूथ अध्यक्ष राजू आर्या के घर नाश्ता करके नितिन नवीन ने एक तीर से दो निशाने साधे। सामाजिक समरसता का संदेश देने के साथ ही उन्होंने जताया कि भाजपा का हर कार्यकर्ता उनके लिए बराबर का खिलाड़ी है। इसके अलावा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के प्रचार अभियान में वंदेमातरम, एसआईआर, तुष्टिकरण का विरोध भी पार्टी के मुख्य सहयोगी हथियार होंगे।
आर्य के घर चाय पीकर एक तीर से दो निशाने
नितिन नवीन ने गुरुवार सुबह अचानक मोटाहल्दू के जयपुर वीसा गांव पहुंचकर एससी वर्ग से जुड़े बूथ अध्यक्ष के घर चाय पी। इससे उन्होंने एक ओर एससी वर्ग को साधा तो दूसरी ओर यह संदेश दिया कि उनके लिए हर कार्यकर्ता की अहमियत है।
नितिन नवीन बेरीपड़ाव स्थित प्रसिद्ध अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। वापसी में उनका काफिला जयपुर वीसा गांव की ओर मुड़ गया। वे भाजपा बूथ अध्यक्ष पूर्व प्रधान राकेश कुमार आर्य के घर पहुंचे। नवीन के अचानक पहुंचने से राकेश और परिजन हैरान रह गए। नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सांसद अजय भट्ट, मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक नवीन दुम्काआदि भी थे। राष्ट्रीय अध्यक्ष आत्मीयता के साथ राकेश के परिजनों से मिले।
नितिन नवीन ने परिजनों के साथ फोटो भी खिंचवाई और घर पर चाय पी। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद शुद्धीकरण का मामला छाया हुआ है। ऐसे में एक दलित बूथ अध्यक्ष के घर जाकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चाय पीना राजनीतिक रूप से खासा चर्चाओं में है।
हार को जीत में बदलने के लिए तैयारी
भाजपा का बड़े जिलों और 2022 के चुनाव में हारी सीटों पर फोकस रहेगा। 70 सीटों में से जरूरी बहुमत के 36 सीट के आंकड़े के बराबर सीटें-देहरादून, हरिद्वार, यूएसनगर और नैनीताल में ही हैं। इन जिलों में भाजपा के पास 21 सीट हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के साथ ही सभी सांसद और मंत्रियों को इन जिलों की 15 समेत प्रदेशभर में सभी हारी 23 सीटों की जिम्मेदारी दी गई है। सभी को वहां रात्रिप्रवास कर संगठनात्मक मजबूती और समाज के सभी वर्गों के बीच जाने के निर्देश दिए गए हैं।
नवीन नीति में मोदी मॉडल पर सबसे ज्यादा बैटिंग
नवीन की नीति के मुताबिक भाजपा की चुनावी रणनीति का मुख्य आधार विकास का मोदी मॉडल ही रहेगा। भाजपा की डबल इंजन सरकार होने से प्रदेश के विकास में मिल रहा लाभ जनता के बीच प्रमुखता से रखा जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनमानस के सामने यह साबित करने की भी कोशिश की है कि, देवभूमि के साथ मोदी का नाता केवल सरकार बनाने भर का नहीं है। बल्कि उत्तराखंड उस विचार का पवित्र केंद्र है, जहां से पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरे नेतृत्व को ऊर्जा मिलती है।
कांग्रेस को घेरा
नितिन नवीन के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रदेश प्रवक्ता सुरेश तिवारी ने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड में हाशिए पर खड़ी है। चार साल से अधिक समय तक कांग्रेस नेताओं को जनता की याद नहीं आई, लेकिन चुनाव नजदीक आते ही वे सक्रिय होने लगे हैं।



