
देहरादून.
कांग्रेस ने भाजपा पर हमला बढ़ाया तो भाजपा ने भी एक साथ कई हमले कर दिए हैं। ताजा हमला मियां शब्द पर कांग्रेस की आपत्ति को लेकर किया। कांग्रेस की मियां शब्द से आपत्ति ने भाजपा को तुष्टीकरण की राजनीति के पुराने पन्ने खोलने का मौका दे दिया है।
भाजपा अब कांग्रेस की आपत्ति को तुष्टीकरण से जोड़कर बहस को यूसीसी, धर्मांतरण, धार्मिक अतिक्रमण, मदरसों व लव जिहाद से कनेक्ट कर रही है। भाजपा मियां विवाद को व्यापक बहस का केंद्र बनाने के मूड में है। कांग्रेस की आपत्ति को भाजपा उसकी राजनीतिक असहजता के तौर पर भी पेश कर घेरने का प्रयास कर रही है।
भाजपा अब कांग्रेस पर पूरी तरह हमलावर
भाजपा का हमला यही नहीं रुकता। जमीन विवाद में भी कांग्रेस को जवाब देकर भाजपा घेराबंदी का मौका नहीं चूक रही। यूआइआइडीबी को सात हजार बीघा जमीन देने के कांग्रेस के आरोप को भाजपा ने खारिज करते हुए 45 एकड़ भूमि उपलब्ध होने की बात कही है। सात हजार बीघा जमीन देने की किसी प्रक्रिया से इनकार करते हुए भाजपा ने भूमि के उपयोग को निवेश और रोजगार से जोड़कर सामने रखा है। पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में पूंजी निवेश को वक्त की जरूरत बताकर भाजपा जमीन के सवाल को विकास की बहस में बदलना चाहती है।
भाजपा अब कांग्रेस की आपत्ति को तुष्टीकरण से जोड़कर कनेक्ट कर रही
कांग्रेस शासनकाल की भर्ती अनियमितताओं का हवाला देते हुए भाजपा अब कांग्रेस पर पूरी तरह हमलावर है। भाजपा का कहना है कि जिन मामलों की जड़ें कांग्रेस शासनकाल तक जाती हैं, उन पर विपक्ष आज खुद को जवाबदेही से अलग नहीं कर सकता। इस तरह कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी हमले को उसके पुराने रिकार्ड के सामने खड़ा कर भाजपा ने मुद्दे को कमजोर किया है।
कांग्रेस के पुराने भर्ती घोटाले, जमीन विवाद भी उठाए
मियां, जमीन और भ्रष्टाचार के मुद्दे भले अलग-अलग हों, लेकिन भाजपा इन्हें एक ही राजनीतिक हमले में पिरोकर कांग्रेस पर हमलावर है। चुनाव से पहले अब कांग्रेस सरकार के फैसलों को चुनावी मुद्दा बनाकर सत्ता पर दबाव बढ़ाना चाहती है, जबकि भाजपा हर नए आरोप के साथ कांग्रेस के पुराने राजनीतिक फैसलों और शासनकाल को चर्चा में लाने की कोशिश कर रही है। आशय साफ है कि चुनावी लड़ाई अब सिर्फ सरकार के कामकाज का हिसाब मांगने तक सीमित नहीं, भाजपा विपक्ष से भी उसके पुराने फैसलों का हिसाब मांगने की तैयारी में है।



