उत्तराखंडराज्य

निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली ने की आत्महत्या, हरिद्वार में चाय की दुकान पर लगाया फंदा

 हरिद्वार 

जेल की चारदीवारी के पीछे सुरेंद्र कोली ने करीब 19 साल गुजार दिए. इतने लंबे वक्त में उसके खिलाफ चले मुकदमों ने कई बार नया मोड़ लिया. कभी मौत की सजा मिली, कभी अदालत से राहत मिली और आखिर में नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे आखिरी मामले में भी बरी कर दिया. यानी जिस शख्स का नाम कभी निठारी कांड की सबसे भयावह कहानियों के साथ जुड़ा था, वह आखिरकार जेल से बाहर आ गया. लेकिन बाहर की जिंदगी ज्यादा लंबी नहीं चली. शुक्रवार को हरिद्वार में उसकी मौत हो गई. शुरुआती जानकारी के मुताबिक कोली ने उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 

अब कहानी का दूसरा सिरा हरिद्वार से जुड़ गया है. करीब 19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में बाहर आया कोली करीब 310 दिन भी आजाद जिंदगी नहीं जी सका. जिस निठारी कांड ने 2005-06 में पूरे देश को हिला दिया था, उसी मामले के आरोपी की कहानी का अंत हरिद्वार में हुआ. एक वक्त उसके खिलाफ 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी. फिर अदालतों में सबूतों पर सवाल उठे. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में 12 मामलों में बरी किया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी दोषमुक्त कर दिया. अब उसकी मौत ने इस पुराने और बेहद चर्चित मामले की कहानी को फिर चर्चा में ला दिया है।

चाय की दुकान में लगा ली फांसी
शहर कोतवाली की सप्त ऋषि पुलिस चौकी पर सूचना मिली कि सप्त सरोवर रोड लालमाता मंदिर के सामने चाय की दुकान में फांसी लगा ली है। पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक की फचाम सुरेंद्र कोली निवासी ग्राम मंगरुखाल, भिकियासेड़ अल्मोड़ा के रूप में कराई।

शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने बताया कि सुरेंद्र कोली निठारी कांड में आरोपित रहा है। शुरुआती जांच में पता चला है कि वह कुछ महीनो से हरिद्वार में रह रहा था और चाय का खोखा किराए पर लेकर चला रहा था। दुकान से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, हर एंगल से मामले की जांच की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया था बरी
बता दें कि साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। 2006 में निठारी हत्या व दुष्कर्म कांड सामने आया था। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई थी। 2015 में न्यायालय ने फांसी की सजा में राहत देते हुए उम्रकैद सुनाई थी। निठारी हत्याकांड से जुड़े आखिरी मामले में भी सुरिंदर कोली को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी. 11 नवंबर 2025 को अदालत ने उसे इस मामले में बरी कर दिया था. अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोली को दोषी ठहराने और सजा सुनाने के लिए पिछली अदालतों ने जिन सबूतों को आधार बनाया, वे कानूनी कसौटी पर खरे नहीं उतरते थे. अदालत के मुताबिक ये सबूत अवैध, भरोसे के लायक नहीं और आपस में विरोधाभासी थे। 

क्या है पूरा मामला
निठारी इलाके में 2005-06 के दौरान बच्चों और महिलाओं के लापता होने की घटनाओं ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी थी. लगातार सामने आ रहे इन मामलों की पड़ताल के दौरान पुलिस 29 दिसंबर 2006 को सेक्टर-31 स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी D-5 तक पहुंची. कोठी के पीछे मौजूद नाले और आसपास के इलाके की तलाशी में पुलिस को कई मानव खोपड़ियां, हड्डियां, कपड़े और दूसरी चीजें मिली थीं। 

इन बरामदगियों के बाद मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया गया था. इसके बाद जनवरी 2007 में इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई. पुलिस ने गुमशुदगी और अपराध से जुड़े कुल 19 अलग-अलग FIR दर्ज किए थे. इनमें से 16 मामलों में CBI ने चार्जशीट दाखिल की थी. जांच के दौरान सुरेंद्र कोली पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने जैसे आरोप लगाए गए थे। 

2004-05 में रोजगार के सिलसिले में पहुंचा था दिल्ली
सुरेंद्र कोली अल्मोड़ा के मंगरूखाल का रहने वाला था। परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकालने के लिए वहवर्ष 2004-05 में रोजगार के सिलसिले में दिल्ली गया था। दिल्ली में वह मनिंदर सिंह पंधेर के यहां नौकरी करने लगा। 2006 में निठारी हत्या व दुष्कर्म कांड सामने आया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। 

 

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