
देहरादून.
बिजली की मांग और उत्पादन में तय शेड्यूल से होने वाले अंतर यानी विचलन का वित्तीय हिसाब अब नए सिरे से तय हो सकता है। इसका असर बिजली खरीद की लागत और आगे चलकर उपभोक्ताओं के टैरिफ पर भी पड़ सकता है।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने संबंधित मामलों के लिए विनियम-2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। पर्याप्त सुझाव नहीं मिलने पर आयोग ने आपत्ति और सुझाव देने की अंतिम तारीख 28 सितंबर तक बढ़ा दी है। पहले यह तारीख 17 सितंबर थी।
5900 करोड़ का भार –
उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं पर 5900 करोड़ का भार डालने का ऊर्जा निगम का प्रस्ताव स्वीकार हुआ तो उपभोक्ताओं पर महंगी बिजली की गाज गिरना तय है। एक आकलन के अनुसार, इन 5900 करोड़ की रिकवरी के लिए बिजली का मूल्य कुछ समय तक प्रति यूनिट तीन रुपये तक बढ़ सकता है। दरअसल, बुधवार को विद्युत नियामक आयोग में इस मुद्दे पर सुनवाई हुई थी। जनता की ओर से विरोध जताने के लिए कोई नहीं पहुंचा। इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के प्रतिनिधि राजीव अग्रवाल अपने एक सहयोगी के साथ पहुंचे थे। उन्होंने दो टूक कहा कि 25 साल बाद जनता क्यों इस अतिरिक्त भार को सहन करे। जिस संपत्ति ट्रांसफर की बात की जा रही है, उसके धरातल पर जांच का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इस मामले में उपभोक्ता का हित देखा जाए।
लोगों के न पहुंचने पर आयोग अध्यक्ष भी हैरान
सुनवाई में जनता की ओर से लोगों के न आने से आयेाग अध्यक्ष एमएल प्रसाद भी हैरान थे। उन्होंने बताया कि सुनवाई में आपत्ति दर्ज कराने को पूरा समय दिया गया था। सूचना प्रकाशित कराने से लेकर वेबसाइट पर भी सूचना दी गई थी।
यह है मामला
यूपी से अलग होने के समय 550 करोड़ की संपत्ति बिजली योजनाओं के रूप में उत्तराखंड को मिली। यह 550 करोड़ एसेट के रूप में ऊर्जा निगम को बिजली दरों में मिलने थे, जो आज तक नहीं मिले। इस बीच साल-दर-साल इस 550 करोड़ की संपत्ति के रखरखाव पर होने वाले खर्च जुड़ते हुए यह रकम अब 5900 करोड़ तक पहुंच गई है। वित्त विभाग इस रकम को ऊर्जा निगम से मिलने वाले पैसे के साथ बुक एडजस्टमेंट करने को तैयार नहीं है। ऐसे में ऊर्जा निगम ने इसे जनता से वसूलने की मांग की है। जनसुनवाई के बाद अब विद्युत नियामक आयोग आपत्ति और सुझाव का परीक्षण करेगा। इसके बाद ही ऊर्जा निगम के प्रस्ताव पर कोई फैसला लिया जाएगा।
बिजली के मौजूदा उपभोक्ता रेट (रुपये प्रति यूनिट) –
बीपीएल 1.85
घरेलू 3.65 से 7.80
कमर्शियल 5.75 से 6.00
उद्योग 5.75 से 8.91



