बिहार / झारखंडराज्य

कोसी-मेची लिंक परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, किशनगंज में 571 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण

किशनगंज
 कोसी नदी में मानसून के दौरान तबाही मचाने वाले अतिरिक्त पानी को सीमांचल के खेतों की प्यास बुझाने के काम में लाने वाली महत्वाकांक्षी 'कोसी-मेची इंट्रा-स्टेट लिंक परियोजना' अब धरातल पर उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। किशनगंज जिले में परियोजना के निर्माण कार्य को लेकर कुल 571 एकड़ भूमि चिह्नित कर ली गई है।

इसमें 552 एकड़ रैयती (निजी) भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा, जबकि 19 एकड़ सरकारी भूमि शामिल है। भूमि का सबसे बड़ा हिस्सा बहादुरगंज अंचल से अधिग्रहित किया जाएगा। परियोजना की कार्ययोजना के तहत कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को नियंत्रित नहर प्रणाली के जरिए महानंदा नदी बेसिन तक पहुंचाया जाना है।

117.50 किलोमीटर लंबी इस लिंक नहर का अंतिम छोर किशनगंज जिले के माखनपुर गांव के समीप मेची नदी में होगा। कोसी से निकला पानी नहर के रास्ते किशनगंज पहुंचेगा और मेची नदी में विसर्जित होकर महानंदा नदी तंत्र का हिस्सा बन जाएगा।

बहादुरगंज अंचल में सबसे अधिक 454 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण
प्रशासन द्वारा तैयार किए गए भूमि विवरणी के अनुसार, बहादुरगंज अंचल में सर्वाधिक 454 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है, जिसमें 13 एकड़ सरकारी जमीन है। इसके अलावा टेढ़ागाछ अंचल में 99 एकड़ (3 एकड़ सरकारी) और ठाकुरगंज अंचल के एक गांव में 17 एकड़ (2 एकड़ सरकारी) भूमि अधिग्रहण के दायरे में आएगी।

कोसी-मेची लिंक परियोजना
    चिह्नित कुल भूमि: 571 एकड़ (552 एकड़ निजी + 19 एकड़ सरकारी)।

    अंचलवार भूमि विवरण:

        बहादुरगंज अंचल: 454 एकड़ (13 एकड़ सरकारी)।

        टेढ़ागाछ अंचल: 99 एकड़ (3 एकड़ सरकारी)।

        ठाकुरगंज अंचल: 17 एकड़ (2 एकड़ सरकारी)।

    नहर की संरचना (कुल लंबाई 117.50 किमी):

        भाग-1: वीरपुर बराज से फारबिसगंज तक पूर्वी कोसी मुख्य नहर (41.30 किमी) का विस्तार।

        भाग-2: फारबिसगंज से किशनगंज के माखनपुर तक नई नहर (76.20 किमी)।

    अंतिम पड़ाव: किशनगंज का माखनपुर गांव (मेची नदी संगम)।

    लागत व समय-सीमा: अनुमानित 6,282.32 करोड़ रुपये (केंद्र अंशदान ₹3,652.56 करोड़); मार्च 2029 तक लक्ष्य।

    लाभान्वित प्रखंड (किशनगंज): टेढ़ागाछ, दिघलबैंक, बहादुरगंज और कोचाधामन।

41.30 किमी पुरानी नहर का विस्तार, 76.20 किमी बनेगी नई नहर
कोसी-मेची लिंक परियोजना को दो मुख्य भागों में बांटा गया है। पहले हिस्से में वीरपुर बराज से फारबिसगंज तक पूर्वी कोसी मुख्य नहर (ईकेएमसी) के 41.30 किलोमीटर हिस्से का जीर्णोद्धार और क्षमता विस्तार होगा। इसके बाद फारबिसगंज से लेकर किशनगंज के माखनपुर तक 76.20 किलोमीटर लंबी पूरी तरह नई नहर का निर्माण किया जाएगा।

इस परियोजना के जरिए पूर्वी कोसी मुख्य नहर की जल वहन क्षमता को 15 हजार क्यूसेक से बढ़ाकर 20 हजार क्यूसेक किया जाएगा।

किशनगंज के 4 प्रखंडों में 39,548 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित
इस परियोजना से किशनगंज जिले के चार प्रमुख प्रखंडों—टेढ़ागाछ, दिघलबैंक, बहादुरगंज और कोचाधामन के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। जिले के 39,548 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सालोंभर सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा उपलब्ध होगी। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए चार मुख्य शाखा नहरों और छह वितरणियों (डिस्ट्रीब्यूटरी) का विस्तृत नेटवर्क बिछाया जाएगा।

बाढ़ प्रबंधन के साथ 2.14 लाख हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य
मानसून के दौरान कोसी नदी से लगभग 2,050 मिलियन क्यूबिक मीटर अतिरिक्त बाढ़ के पानी को डायवर्ट कर सीमांचल भेजा जाएगा। इससे कोसी क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका कम होगी और अररिया, पूर्णिया, किशनगंज व कटिहार जिलों के 2,14,813 हेक्टेयर खेतों को पानी मिलेगा।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) में शामिल इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 6,282.32 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार 3,652.56 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दे रही है। इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जिले में कोसी-मेची लिंक परियोजना के फेज-टू के तहत भूमि अधिग्रहण की आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसका औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर संबंधित विभाग को भेजा गया है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होते ही नहर निर्माण का कार्य तेजी से शुरू कराया जाएगा।
— नवीन कुमार, जिलाधिकारी, किशनगंज

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