उत्तराखंडराज्य

ऊधम सिंह नगर में धान की फसल बर्बाद, बाजपुर के किसानों पर पड़ा ₹7 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

बाजपुर 
आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में धान की फसल बिछने से अब कटाई-मड़ाई का खर्च कई गुना बढ़ने की आशंका है। तहसील प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में करीब 6950 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित हुई है।

इनमें 19 गांवों में शत-प्रतिशत नुकसान हुआ है। किसानों ने सरकार से वास्तविक क्षति का आकलन कर मुआवजा देने और कटाई-मड़ाई के लिए विशेष आर्थिक सहायता की मांग की है। तराई में किसान सामान्य तौर पर धान की कटाई कंबाइन और हार्वेस्टर से कराते हैं।

इसमें एक हेक्टेयर में करीब सात से आठ हजार रुपये खर्च आता है, लेकिन जमीन पर बिछी फसल की मशीन से कटाई मुश्किल होने से मजदूरों से कटवाना पड़ता है। अनुमान के मुताबिक, एक हेक्टेयर में करीब 25 मजदूरों की जरूरत होगी, जिनकी मजदूरी 12,500 रुपये बैठेगी।

इसके बाद थ्रेसर से मड़ाई पर करीब पांच हजार रुपये अतिरिक्त खर्च आएगा। इस तरह कुल लागत करीब 17,500 रुपये प्रति हेक्टेयर पहुंच सकती है।

मशीन से कटाई की तुलना में नौ से दस हजार रुपये अतिरिक्त खर्च के हिसाब से किसानों पर करीब सात करोड़ रुपये का बोझ पड़ने का अनुमान है। फसल की पैदावार और गुणवत्ता में गिरावट से नुकसान और बढ़ सकता है। खेतों में पानी भरने और मजदूरों की कमी से कटाई में देरी होने की आशंका है।

किसानों ने उठाई मुआवजे की मांग
आपदा से किसानों की कमर टूट गई है। सरकार वास्तविक नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा और कटाई-मड़ाई के लिए आर्थिक सहायता दे। जोरावर सिंह भुल्लर- किसान।

गिरे धान की कटाई का खर्च कई गुना बढ़ गया है। सरकार विशेष राहत पैकेज देकर जल्द मुआवजा उपलब्ध कराए।
सतवंत सिंह पड्डा- किसान।

कटाई में देरी से धान की गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित हो सकती है। किसानों को तत्काल राहत और बढ़े खर्च में सहायता मिलनी चाहिए।
राणा इंदरपाल सिंह- किसान

हमारी प्रशासन से गांव-गांव जाकर निष्पक्ष सर्वे कराने की मांग है, ताकि कोई भी प्रभावित किसान सर्वे से छूटने न पाए और सभी पात्र किसानों को समय पर राहत मिले।
सरताज औलख- किसान।

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