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नवरात्रि पारण के बाद कलश, नारियल और जौ का क्या करें? जानें पूजा सामग्री के विसर्जन के नियम

शारदीय नवरात्र में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन के साथ ही महापर्व अपने समापन की ओर बढ़ गया है. अष्टमी-नवमी तिथि पर कन्या पूजन के बाद नवरात्र का पारण किया जाता है. ऐसे में बहुत से लोगों का एक सवाल रहता है कि नवरात्र में इस्तेमाल हुए कलश, बर्तन, नारियल या पूजा के सामान का क्या करना चाहिए और दादी-नानी के समय पारण कैसे किया जाता था. आइए आज आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं।

कलश
अष्टमी-नवमी के कन्या पूजन के बाद घटस्थापना के कलश को नदी या तालाब में विसर्जित करने की परंपरा है. अगर आपने घटस्थापना के लिए मिट्टी के कलश का प्रयोग किया है तो आप इसे पवित्र नदी-तालाब में विसर्जित कर सकते हैं. लेकिन अगर आपने पीतल, ताम्बे या किसी अन्य धातु के कलश का इस्तेमाल किया है तो इसे साफ करके पूजा-पाठ जैसे कार्यों में नियमित इस्तेमाल कर सकते हैं।

कलश में रखा सिक्के
घटस्थापना के समय कई लोग कलश में जल भरने से पहले एक सिक्का रखते हैं. पूजा पूरी होने पर कलश का जल निकालकर सिक्का बाहर निकाल लें. मान्यता के अनुसार, इसे घर के धन रखने वाले स्थान या तिजोरी में रखा जा सकता है. व्यापार करने वाले लोग इसे अपनी दुकान के गल्ले में भी रखते हैं. इसे शुभता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

कलश का जल
नवमी-अष्टमी का धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद कलश के जल को घर के अलग-अलग हिस्सों में छिड़क सकते हैं. मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है. आप चाहें तो इसे जल को तुलसी या अन्य पौधों में डाल सकते हैं. अगर आपके घर में पौधे नहीं हैं तो आप आस-पास मौजूद किसी पेड़ की जड़ में भी इसे डाल सकते ह।

नारियल
घटस्थापना के समय कलश के ऊपर रखे नारियल को अष्टमी-नवमी के कन्या पूजन के समय देवी स्वरूपा कन्याओं में बांट दिया जाता है. नारियल को फोड़कर परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में भी प्रसाद के रूप में वितरित कर सकते हैं।

जौ
घटस्थापना के समय बोए गए जौ नवरात्र के दौरान अंकुरित होते हैं. मान्यता है कि यह जौ घर की सुख-समृद्धि का प्रतीक होती हैं. अष्टमी-नवमी के कन्या पूजन के बाद जौ को श्रद्धापूर्वक विसर्जित करने की परंपरा है. इन्हें कूड़े में या किसी गंदे स्थान पर फेंकने के बजाय साफ जगह पर रखें. किसी भी पवित्र नदी या तालाब में इसे विसर्जित किया जा सकता है।

अखंड ज्योत, फूलमाला, पूजन सामग्री
नवरात्र में कई भक्त पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाते हैं. मान्यता है कि इस अखंड ज्योत को कभी बुझने नहीं देना चाहिए. नवरात्र समाप्त होने के बाद पारण के समय अखंड ज्योति के दीपक को नदी-तालाब में विसर्जित कर सकते हैं. लेकिन ऐसा तभी करें जब दीपक मिट्टी का हो. अगर दीपक किसी धातु का है तो उसे साफ कर दैनिक पूजा-पाठ में प्रयोग किया जा सकता है. पूजा में चढ़ाए गए फूल या अन्य पूजन सामग्री को भी पारण के समय विसर्जित कर दिया है।

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