
देहरादून
त्योहारों का सीजन आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है, लेकिन इसके साथ ही मिलावटखोरों और मुनाफाखोरों का गिरोह भी सक्रिय हो जाता है. दूध, मावा, पनीर के साथ-साथ मिठाइयों में भी बड़े पैमाने पर मिलावट और बासी सामान बेचे जाने की शिकायतें सामने आती हैं. दरअसल, अक्सर दुकानों पर मिलने वाली खुली मिठाइयों पर कोई टैग, निर्माण की तारीख या एक्सपायरी डेट नहीं होती है, जिससे ग्राहक यह तय नहीं कर पाते कि मिठाई ताज़ा है या पुरानी. लोगों के स्वास्थ्य से हो रहे इस खिलवाड़ को रोकने और खाद्य सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए उत्तराखंड खाद्य संरक्षा और औषधि प्रशासन ने अब ये कदम उठाया है।
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडे की ओर से जारी आदेश के मुताबिक अब मिठाई विक्रेताओं को अपनी दुकानों में काउंटर या ट्रे पर खुली मिठाइयों के आगे यह साफ-साफ लिखना होगा कि यह मिठाई कब बनाई गई है और इसे कब तक खाया जा सकता है. इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सिर्फ पारंपरिक मिठाइयां ही नहीं, बल्कि बेकरी से जुड़े उत्पादों पर भी उपयोग की अवधि की जानकारी देनी होगी. आमतौर पर मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की उपयोग अवधि एक दिन से लेकर 30 दिन तक होती है, जिसे अब ग्राहकों के लिए दिखाना और बताना जरूरी होगा।
इस नियम के तहत दुकानदारों को बिक्री के लिए रखी सभी मिठाइयों की ट्रे और काउंटर पर तारीख स्पष्ट रूप से लिखनी होगी। जिसके संबंध में खाद्य संरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने आदेश जारी किए हैं।
राज्य में अब तक पैकेट में बिकने वाले खाद्य पदार्थों पर ऐसी जानकारी देना अनिवार्य था लेकिन खुली मिठाइयों को लेकर उपभोक्ताओं को पता नहीं चल पाता था कि उन्हें कब बनाया गया और वे कितने समय तक खाया जा सकता हैं।
निरीक्षण के दौरान सामने आई कमी पर बनाया गया नियम
हाल में प्रदेश भर में मिठाई की दुकानों पर चल रहे खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान के दौरान सामने आया कि खुली मिठाइयों की निर्माण तिथि और उपयोग की अंतिम तारीख ग्राहकों को नहीं बताई जा रही थी।
इससे कई बार खराब मिठाइयों को भी बेच दिया जाता है और दुकानों में अलग-अलग तरह की मिठाइयां बिक्री के लिए रखी होती है, लेकिन उनकी ताजगी और उपयोग के समय के संबंध में कोई जानकारी नहीं रहती।
विभाग ने इसी समस्या को देखते हुए खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों पर तारीख प्रदर्शित करने की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
मिठाई के इस्तेमाल की मिलेगी सटीक जानकारी
मिठाइयों और बेकरी उत्पादों को इस्तेमाल करने का समय उनकी प्रकृति और तैयार करने के तरीके के अनुसार अलग-अलग होती है। कुछ मिठाइयां और खाद्य उत्पाद एक दिन तक ही उपयोग में योग्य रहते हैं। कुछ मिठाइयों के उपयोग का समय 30 दिन तक हो सकता है।
नई व्यवस्था के तहत ग्राहकों को संबंधित उत्पाद की निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट या यूज बाय डेट की जानकारी मिलेगी। इससे ग्राहक मिठाई को उसकी एक्सपायरी डेट के हिसाब से खरीद सकेंगे।
त्योहार और शादी के सीजन में बढ़ेगी उपयोगिता
त्योहारों और शादी-विवाह के सीजन में मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। इस दौरान दुकानों पर बड़ी मात्रा में मिठाइयां तैयार कर बिक्री के लिए रखी जाती हैं।
कई बार ग्राहक मिठाई खरीदते समय यह नहीं जान पाते कि वह उसी दिन तैयार की गई है या पहले से रखी हुई है। नई व्यवस्था से ग्राहकों को यह जानकारी मिल सकेगी। दुकानदारों को अब मिठाई की किस्म और कीमत के साथ उसकी निर्माण तिथि और उपयोग की अंतिम तिथि भी बतानी होगी।
बासी और खुली मिठाइयां सेहत के लिए है नुकसान दे
बिना डेट और बासी मिठाई खाने से आम लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ता है. दरअसल, त्योहारी सीजन के दौरान खुली मिठाइयों पर मक्खियों के बैठने, धूल मिट्टी जमने या पुरानी चाशनी के इस्तेमाल से फूड पॉइजनिंग के मामले सबसे ज्यादा आते हैं. कई बार दुकानदार पुराना स्टॉक निकालने के लिए हफ्तों पुरानी मिठाइयां बेचते हैं, जिससे पेट के संक्रमण, लीवर और किडनी से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसके अलावा मानकीकरण न होने की वजह से कई बार सब स्टैंडर्ड और हानिकारक रंगों का प्रयोग किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है।
विभाग के इस कड़े नियम से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि दुकानदारों में भी जवाबदेही तय होगी. अगर कोई विक्रेता बिना निर्माण और एक्सपायरी डेट के खुली मिठाइयां बेचता पाया गया, तो खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत उसके खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी. उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे खरीदारी करते समय गुणवत्ता और तिथि की जांच अवश्य करें।



