ईरान युद्ध का असर: दिल्ली के होटल-ढाबों में बढ़ी महंगाई, चाय से रोटी तक महंगी; दाल मखनी-कबाब मेन्यू से गायब

ईरान
ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध की वजह से उपजे गैस संकट का असर राजधानी के होटलों पर देखने को मिल रहा है। होटल ईंधन बचाने के लिए कई तरह के बदलाव कर रहे हैं। खासतौर पर धीमी आंच पर पकाने वाले पकवान जैसे कबाब और दाल मखनी को मेन्यू से अस्थायी रूप से हटा दिया गया है। वहीं, अधिकतर होटल-ढाबों में खाना-पीना महंगा हो चुका है। लागत में इजाफे की वजह से ग्राहकों को चाय से रोटी तक के लिए अधिक कीमत देनी पड़ रही है।
दाल मखनी और गलौटी कबाब जैसी डिशेज जिन्हें 8 से 12 घंटे तक धीमी आंच पर पकाना पड़ता है, उन्हें कई रेस्तरां ने अस्थायी रूप से अनुपलब्ध कर दिया है। गैस आधारित तंदूरों का उपयोग सीमित कर दिया गया है। कई होटलों में अब केवल पीक ऑवर्स (रात 8 से 11 बजे) में ही तंदूरी डिशेज परोसी जा रही हैं। होटलों ने अपने 10-15 पन्नों के विस्तृत मेन्यू को छोटा करके 2-3 पन्नों का लिमिटेड मेन्यू कर दिया है। फोकस उन डिशेज पर है जो सॉते या स्टीमिंग तकनीक से जल्दी बन जाती हैं, क्योंकि इनमें गैस की खपत कम होती है।
कई प्रीमियम डाइनिंग आउटलेट्स अब कोल्ड ऐपेटाइज़र सलाद और सैंडविच जैसी चीजों को प्रमोट कर रहे हैं जिन्हें पकाने की आवश्यकता नहीं होती। इससे उनकी गैस की निर्भरता कम हो रही है। बड़े होटलों ने भारी कमर्शियल इंडक्शन प्लेट्स, एयर फ्रायर्स और इलेक्ट्रिक ओवन का इस्तेमाल 40% तक बढ़ा दिया है। हालांकि, इससे बिजली के बिल में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन गैस की अनिश्चितता से बचने का यह एकमात्र तरीका बचा है। इससे उनका ब्रांड का नाम कायम रहेगा। होटलों में लाइव कुकिंग काउंटर (जहां शेफ सामने खाना बनाते थे) ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र होते थे, उन्हें फिलहाल बंद कर दिया है क्योंकि वहां गैस की बर्बादी अधिक होती है।
रेहड़ी-पटरी व छोटे ढाबों पर आजीविका का संकट
यह वर्ग स्ट्रीट फूड संस्कृति का आधार है। इन्हें रोजाना नकद में सिलेंडर लेना पड़ता है। आपूर्ति कम होने से वेंडर्स छोटे दुकानदारों के बजाय बड़े होटलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सिलेंडर न मिलने पर कई रेहड़ी वाले अवैध रिफिलिंग (छोटे 5 किलो के अवैध सिलेंडर) का सहारा ले रहे हैं। गैस की कीमत बढ़ने से रोज़ाना की बचत में ₹200-₹400 की कमी आई है।
7 रुपये वाली रोटी 9 की हुई
गैस सिलेंडर आपूर्ति प्रभावित होने से द्वारका मोड़ इलाके में एक रेस्तरां ने रोटी के दाम में अचानक दो रुपये की बढ़ोतरी कर दी। रेस्तरां मालिक का कहना था कि गैस का दाम बढ़ने के चलते रोटी का दाम भी बढ़ाना पड़ रहा है। द्वारका मोड़ इलाके में रहने वाले आकाश कुमार ने बताया कि अक्सर ऑफिस से देर से आने पर वह सब्जी तो घर में बनाते हैं लेकिन रोटी रेस्तरां से मंगा लेते हैं। उनके करीब स्थित एक रेस्तरां में तवा रोटी उन्हें सात रुपये के दर से पड़ती है, अब अचानक मालिक ने दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं, नोएडा में एक चाय विक्रेता ने बताया कि उन्होंने 10 रुपये वाली चाय की कीमत अब 15 रुपये कर दी है। उन्होंने कहा कि जो सिलेंडर उन्हें 1000 रुपये में मिल जाता था उसके लिए अब 2500 रुपये देने पड़े हैं। इस वजह से कीमत में इजाफा करना पड़ा है।
ढाबा बंद होने की कगार पर
कनॉट प्लेस स्थित सिंधिया हाउस के पास एक तंग गली में स्थित ढाबा अब बंद होने की कगार पर है। यह ढाबा ऑफिस कर्मचारियों, टैक्सी ड्राइवरों और दूसरे रोजगार से जुड़े लोगों के लिए सस्ता और स्वादिष्ट भोजन का प्रमुख ठिकाना है, लेकिन कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई रुकने से मालिक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ढाबा मालिक ने बताया कि उनके यहां रोजाना दो सिलेंडर की खपत होती है, लेकिन अब सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई है। स्टॉक में सिर्फ एक सिलेंडर बचा है, जिसके बाद रसोई ठप हो जाएगी। यहां भोजन करने पहुंचे मेरठ के गोविंद प्रसाद ने कहा कि वे मार्केटिंग के जॉब में हैं, लिहाजा सुबह मेरठ से जल्दी निकलने के कारण टिफिन नहीं लाते, दोपहर में यह ढाबा ही सहारा है। यदि बंद हुआ तो महंगे रेस्टोरेंट में खाना या घर से पैक करना पड़ेगा, जो मुश्किल होगा। टैक्सी ड्राइवर वीरू मौर्या ने बताया कि मंडी हाउस के अन्य ढाबों में भी रेट बढ़ गए हैं।
समारोह में खाने के मेन्यू में कटौती की
सरोजिनी नगर में स्थित सामुदायिक भवन में अलग-अलग दिनों में शादी समारोह हैं। एलपीजी गैस संकट के बीच बैंक्वेट हॉल में भी परेशानी बढ़ गई है। हलवाइयों ने खाने के मेन्यू में कटौती कर दी है। पिलंजी गांव के रहने वाले रोहन ने बताया कि शुक्रवार को उनके भाई की रिसेप्शन पार्टी है। वहीं, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिक रुपये देने पर भी कोई सिलेंडर देने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि घर पर मेहमान आ रहे हैं। लेकिन, अचानक आए एलपीजी संकट ने पूरी तैयारी बिगाड़ दी है। रोहन ने बताया कि उन्होंने जिसे खाने का ठेका सौंपा था, उन्होंने अंतिम मौके पर सिलेंडर की कमी होने पर तय मेन्यू तैयार करने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि 30 से 40 फीसदी मेन्यू में कटौती की गई है।



