
लुधियाना/जालंधर
खाड़ी देशों से प्लास्टिक दानों की सप्लाई धीमी होने से कीमतें बढ़ी हैं। शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क ले रही हैं और लंबा रूट अपना रही हैं, जिससे लागत बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने पंजाब के प्लास्टिक उद्योग का गणित बिगाड़ दिया है। पॉलीप्रोपाइलीन (पीपी) बीते तीन महीने में 100 से 150 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। प्लास्टिक दानों की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस उछाल से उत्पादन लागत बढ़ने पर उद्यमी नए ऑर्डर लेने से कतरा रहे हैं।
समुद्री आपूर्ति शृंखला पर युद्ध के असर से पेट्रोकेमिकल उत्पाद महंगे हुए हैं। लुधियाना में पीपी के दाम 50 प्रतिशत बढ़े हैं, जबकि जालंधर में पैकेजिंग उत्पादों (बोतलें, डिब्बे) की कीमतों में 20 प्रतिशत तक उछाल आया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में तनाव से शिपिंग मार्ग प्रभावित हैं।
जालंधर के कारोबारी रवि कपूर ने बताया कि खाड़ी देशों से प्लास्टिक दानों की सप्लाई धीमी होने से कीमतें बढ़ी हैं। शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क ले रही हैं और लंबा रूट अपना रही हैं, जिससे लागत बढ़ रही है। प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. मनकर गर्ग के अनुसार, लंबी अवधि के अनुबंध पुरानी दरों पर पूरे करना घाटे का सौदा बन गया है। मौजूदा ऊंचे दामों पर भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही और कई इकाइयों के पास कुछ दिनों का ही स्टॉक बचा है।
पंजाब भर में पाइप, पैकेजिंग सामग्री और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली हजारों एमएसएमई इकाइयां दबाव में हैं। विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध जारी रहने पर पेट्रोकेमिकल उत्पादों के दामों में 20 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी हो सकती है। उद्योग जगत ने सरकार से एमएसएमई को सस्ते कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, अन्यथा उत्पादन और रोजगार संकट गहरा सकता है।
पैकेजिंग उद्योग पर बढ़ा संकट
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से खाड़ी क्षेत्र के शिपिंग मार्ग प्रभावित हुए हैं। कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की आपूर्ति बाधित होने से नैफ्था और प्लास्टिक दाने महंगे हुए हैं। बोतलें, डिब्बे और कंटेनर की कीमतों में उछाल आया है। माल की आवाजाही धीमी होने और अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क से छोटे उद्यमियों के लिए पुराने ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो गया है।



