उत्तराखंडराज्य

अशोक सिंघल का जीवन हिंदू आस्था और सादगी को समर्पित रहा: सीएम धामी

देहरादून
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिंदू हृदय सम्राट अशोक सिंघल का पूरा जीवन सादगी और करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रति समर्पित रहा। उनके विचार और योगदान समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

मुख्यमंत्री रविवार को विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित श्रद्धेय अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे थे। पटेलनगर स्थित महंत इंद्रेश अस्पताल के राजकीय दून मेडिकल कालेज सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अशोक सिंघल को याद करते हुए उनके जीवन और कार्यों का स्मरण किया।

कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने अशोक सिंघल के योगदान को याद करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। जन्म शताब्दी वर्ष के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में अशोक सिंघल के जीवन, विचारों और सामाजिक योगदान को याद किया गया।

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल का पूरा जीवन देश की एकता, हिंदू धर्म की रक्षा और समाज को संगठित करने के लिए समर्पित रहा। बचपन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रज्जू भैया के संपर्क में आने के बाद वह राष्ट्र और धर्म की सेवा में जुट गए।

विज्ञान के छात्र रहे अशोक सिंघल ने वर्ष 1950 में विज्ञान की पढ़ाई छोड़कर हिंदी ग्रंथों और मठ-मंदिरों की सेवा का मार्ग चुना। उनका जीवन सादगी से भरा था और उन्होंने अनेक राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया।

चंपत राय ने बताया कि अशोक सिंघल के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी मैत्रीपूर्ण संबंध थे। दोनों दिल्ली में आमने-सामने रहते थे। उन्होंने केरल के एक गांव में कथित मतांतरण का विरोध किए जाने का प्रसंग साझा करते हुए कहा कि इस मामले में इंदिरा गांधी ने भी विरोध जताया था।

उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने नई दिल्ली में धर्म संसदों का आयोजन किया, जिनमें 600 से अधिक साधु-संतों ने भाग लिया। उन्होंने देश के प्रमुख अखाड़ों को एकजुट कर उनके कार्यों को यज्ञ की संज्ञा दी। गंगा, गाय और हिंदू धर्म की रक्षा के साथ देशभक्ति की भावना को समाज में मजबूत करने के लिए उन्होंने लगातार काम किया।

चंपत राय ने बताया कि अस्सी के दशक में जब पंजाब में अशांति का माहौल था, तब अशोक सिंघल ने वहां जाने का निर्णय लिया। उन्होंने हरकी पैड़ी से हिमेंद्र साहब तक सद्भावना यात्रा निकाली और हिंदुओं को एकजुट रहने का संदेश दिया। वर्ष 1986 में उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर का प्रारंभिक नक्शा तैयार किया।

मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों की जांच आइआइटी रुड़की की प्रयोगशाला में कराई गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 में बनारस में आयोजित हिंदू सम्मेलन में अशोक सिंघल अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति को संतों के बीच लेकर आए।

उनका मानना था कि हिंदू और बौद्ध समाज एक बड़ी शक्ति हैं तथा सभी हिंदू एक हैं। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वह ममता बनर्जी और मधु दंडवते सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से भी मिलते थे।

चंपत राय ने कहा कि उन्हें अशोक सिंघल के साथ समय बिताने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि सिंघल ने वर्ष 2012 में ही नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता जताते हुए नरेंद्र मोदी को कमान सौंपने की बात कही थी।

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