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हरियाणा में अंगदान को लेकर बदली सोच: 7940 लोगों ने लिया संकल्प, जींद बना नंबर-1

रोहतक.

हरियाणा में अंगदान को लेकर लोगों की सोच में तेजी से बदलाव आ रहा है। प्रदेश में कुल 7940 लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है। जबकि हमारे पड़ोसी पंजाब का आंकड़ा हमसे काफी अच्छा है। पंजाब में पंजीकरण 11274 तक पहुंच चुका है। अभी दोनों राज्यों के बीच में पंजीकरण का अंतर 3334 का है। इसलिए इस अभियान को तेजी से गति देने की जरूरत है। हालांकि जिलों के बीच आंकड़ों में बड़ा अंतर भी सामने आया है, जो जागरूकता के असमान स्तर को दर्शाता है।

प्रदेश में जींद जिला 1076 पंजीकरण के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद गुरुग्राम के 973 पंजीकरण और फरीदाबाद के 791 पंजीकरण का नंबर आता है। सबसे निचले पायदान पर नूंह के 48, चरखी दादरी के 21 और पलवल के 21 पंजीकरण हैं, जहां जागरूकता अभियान की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निचले पायदान पर खड़े जिलों में जागरूकता बढ़ाई जाए तो हरियाणा इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। फिलहाल आंकड़े यह जरूर संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश में अंगदान को लेकर डर से संकल्प की ओर यात्रा शुरू हो चुकी है, लेकिन इसे जनआंदोलन बनाने के लिए अभी और प्रयास जरूरी हैं। नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को प्रदेश में केवल 2 नए पंजीकरण हुए, जिनमें गुरुग्राम और अंबाला से एक-एक व्यक्ति शामिल है। यह संख्या बताती है कि शुरुआती उत्साह के बाद अब अभियान को और गति देने की जरूरत है।

उम्र के आधार पर देखें तो युवा वर्ग इस अभियान में सबसे ज्यादा सक्रिय है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में जागरूकता और सोशल मीडिया की पहुंच इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण है। खासकर युवा वर्ग और पुलिस-सेना जैसे अनुशासित बलों के परिवार सबसे आगे आ रहे हैं। प्रदेश में सोटो के अनुसार ब्रेन डेड की स्थिति में व्यक्ति की वापसी संभव नहीं होती, ऐसे में अंगदान जीवनदान का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। यही कारण है कि अब पुलिस और सेना से जुड़े परिवारों के साथ-साथ युवा वर्ग भी बढ़-चढ़कर इस अभियान में भाग ले रहा है। राज्य में अंगदान के मामलों में भी धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।

वर्ष 2024 में जहां केवल 2 अंगदान हुए थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा 4 से अधिक हो चुका है। साथ ही अब तक करीब 35 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। इस बदलाव के पीछे स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (सोटो) की अहम भूमिका रही है। सोटो ने पिछले दो वर्षों में गांव-गांव तक पहुंच बनाते हुए नुक्कड़ नाटक, स्कूल-कालेज सेमिनार और पंचायत बैठकों के जरिए लोगों को जागरूक किया है।

जिला     कुल पंजीकरण     स्थिति
जींद     1076     प्रथम (अग्रणी)
गुरुग्राम     973     द्वितीय
फरीदाबाद     791     तृतीय
भिवानी     516     –
रोहतक     506     –
महेंद्रगढ़     481     –
पंचकूला     437     –
हिसार     419     –
झज्जर     402     –
सोनीपत     375     –
रेवाड़ी     350     –
सिरसा     287     –
अंबाला     268     –
पानीपत     182     –
फतेहाबाद     174     –
कैथल     171     –
यमुनानगर     159     –
करनाल     150     –
कुरुक्षेत्र     133     –
नूंह     48     सबसे कम
चरखी दादरी     21     सबसे कम
पलवल     21     सबसे कम
कुल योग     7940      

डॉ. एचके अग्रवाल पीजीआइएमएस से मात्र 4 दिन के अंतराल में दो बार ग्रीन कोरिडोर बनाने और आपके समाचारों के सहयोग से लोगों में अंगदान की जागरुकता को लेकर डर कम हो रहा है।
पहले जहां लोग भ्रांतियों के कारण इससे दूर रहते थे, वहीं अब वे खुद सोटो कार्यालय में संपर्क कर प्रक्रिया की जानकारी ले रहे हैं। अंगदान एक ऐसा फैसला है, जिससे एक व्यक्ति 8 लोगों की जान बचा सकता है। मौत अटल है, लेकिन अंगदान के जरिए हम किसी के जीवन का आधार बन सकते हैं।

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