
देवभूमि/देहरादून.
फेमस सिंगर दलेर मेहंदी उत्तराखंड के नरेंद्रनगर में प्रसिद्ध सिद्धपीठ श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले की सांस्कृतिक संध्या के लिए पहुंचे थे। लेकिन मंच पर ओरिजिनल गाने के बजाय डबिंग की तरह लिप-सिंक (होंठ हिलाने) को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
मंत्री ने इसे मेले के मंच और देवभूमि के दर्शकों की भावनाओं का अपमान बताया। उनकी नाराजगी के बाद कुछ देर तक मंच पर सन्नाटा छा गया। मंत्री ने सिंगर को खरी-खोटी सुनाते हुए यहां तक कह दिया कि बोल नहीं पा रहे हो, गाओगे क्या…। लोगों के हंगामा काटने पर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे। उन्होंने गायक दलेर मेहंदी को यह कहते हुए झिड़का कि वह बोल तो पा नहीं रहे हैं तो गाएंगे क्या। हालांकि, कार्यक्रम के बाद दलेर मेहंदी ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। वह लाइव गाने की स्थिति में नहीं थे। कार्यक्रम को जारी रखने के लिए उन्हें डबिंग का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि वह देवभूमि की जनता से मिले प्यार का सम्मान करते हैं।
उत्तराखंड के मंत्री बुरी तरह भड़के
पर्यटन एवं विकास मेले की सांस्कृतिक संध्या दलेर मेहंदी को सुनने के लिए हजारों श्रोताओं पहुंचे। बताया जा रहा है कि दलेर मेहंदी ने मंच पर एक-दो गाने गाए। इसके बाद संगीत के साथ मंच के पीछे से किसी दूसरे गायक की आवाज (डबिंग) सुनाई देने लगी। इससे श्रोताओं का गुस्सा बढ़ने लगा। पंडाल में शोर होने लगा। इस पर मुख्य अतिथि और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल खुद मंच पर पहुंचे और दलेर मेहंदी से आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नरेंद्रनगर की जनता उन्हें लाइव सुनने आई है न कि पीछे से बज रही रिकॉर्डेड आवाज पर प्रस्तुति देखने। उन्होंने दलेर मेहंदी से कहा कि बोल तो पा नहीं रहे हो…गाओगे क्या।
आनन-फानन में बुलाया गया था दलेर मेहंदी को
मेला समिति के अनुसार सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध गायिका सुनंदा शर्मा को कार्यक्रम पेश करना था लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनका कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। इसके बाद समिति ने दो दिन पूर्व बॉलीवुड गायक दलेर मेहंदी से संपर्क कर उन्हें आमंत्रित किया। अंत समय में हुए बदलाव के कारण व्यवस्थाओं में दिक्कतें आईं।
माहौल शांत हुआ तो डीजे की धुन पर थिरके श्रोता
मंच पर विवाद और दर्शकों की नाराजगी से पंडाल में अफरातफरी मच गई। ऐसे में पुलिस-प्रशासन ने मोर्चा संभाला। पुलिस अधिकारियों ने दर्शकों को शांत कराया और सुरक्षा व्यवस्था संभाली। उनकी मुस्तैदी और सूझबूझ से माहौल बिगड़ने से बचा। कार्यक्रम स्थल पर स्थिति को नियंत्रित किया जा सका। आयोजकों ने व्यवस्थाओं में सुधार किया। इसके बाद सांस्कृतिक संध्या का माहौल फिर से खुशनुमा हो गया। डीजे की धुन और गानों पर दर्शक जमकर थिरके।



