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हरियाणा में इंडस्ट्रियल पॉलिसी में बड़ा बदलाव, निवेशकों को मिलेगी राहत

चंडीगढ़

 हरियाणा सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पालिसी में बड़ा बदलाव किया है। इसके अंतर्गत ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में 25 प्रतिशत तक इंडस्ट्रियल कालोनियों को विकसित करने की मंजूरी दी जाएगी।

एग्रीकल्चर जोन में लाइसेंस पर इन्फ्रास्ट्रक्चर लागत का नया नियम लागू होगा। यदि कोई इंडस्ट्रियल लाइसेंस शहरी सीमा से 500 मीटर से बाहर एग्रीकल्चर जोन में लिया जाता है तो वहां आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की लागत संबंधित डेवलपर से वसूल की जाएगी। निवेशकों को राहत प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने ईडीसी (बाह्य विकास शुल्क) में भी राहत प्रदान की है।

हरियाणा सरकार ने साल 2015 में इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पालिसी तैयार की थी, जिसमें 24 मार्च को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधन करने पर सहमति बनी थी। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने संशोधित पालिसी का परिपत्र जारी कर दिया है।

हरियाणा में औद्योगिक विकास पर जोर
नई व्यवस्था के तहत अब प्रकाशित डेवलपमेंट प्लान के अंतर्गत इंडस्ट्रियल जोन के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में भी औद्योगिक कालोनियां स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी। यह अनुमति कुल नियोजित क्षेत्र के 25 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगी।

हरियाणा सरकार का मानना है कि इस बदलाव से राज्य में उद्योगों के लिए सकारात्मक माहौल बनेगा। आसान नियम, लागत में पारदर्शिता और राहत के प्रविधानों के चलते अधिक से अधिक निवेशक नये उद्योग लगाने के लिए आगे आएंगे तथा पुराने उद्योगपतियों को राहत मिलेगी। प्रदेश सरकार राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए लगातार बैठकें कर रही है।

राज्य सरकार का यह निर्णय हरियाणा को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने में सहयोग प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार के संशोधित फैसले के मुताबिक अब शहरी क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करना पहले से अधिक आसान हो जाएगा। पहले केवल सीमित क्षेत्रों में ही उद्योग करने की अनुमति मिलती थी, मगर अब ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन को भी शामिल करने से औद्योगिक विस्तार के नये रास्ते खुलेंगे।

एग्रीकल्चर जोन में ढांचागत विकास का खर्च निवेशक से वसूलेगी सरकार
हरियाणा सरकार ने पालिसी में एक बड़ा बदलाव एग्रीकल्चर जोन को लेकर किया है। यदि कोई इंडस्ट्रियल लाइसेंस शहरी सीमा से 500 मीटर से बाहर एग्रीकल्चर जोन में लिया जाता है, तो वहां आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत संबंधित डेवलपर को वहन करनी होगी

यानी सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं का खर्च सीधे निवेशक से लिया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े और विकास जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़े।

एग्रीकल्चर जोन में लिए इंडस्ट्रियल लाइसेंस के शहरी क्षेत्र में शामिल होने पर ईडीसी माफ
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल की ओर से जारी संशोधित पालिसी के अऩुसार यदि पहले से एग्रीकल्चर जोन में लिया गया इंडस्ट्रियल लाइसेंस बाद में शहरी क्षेत्र में शामिल हो जाता है और उस पर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, तो उस हिस्से पर एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी-बाह्य विकास शुल्क) नहीं लिया जाएगा।

हालांकि, जो हिस्सा अभी अधूरा है, उस पर लागू नियमों के अनुसार ईडीसी देना होगा। इससे पुराने निवेशकों को बड़ी राहत मिलेगी और नये निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

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