बिहार / झारखंडराज्य

JPSC मेधा घोटाले में बड़ा खुलासा, 24 अभ्यर्थियों से हुई थी सेटिंग की डील

रांची
जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में गिरफ्तार बिचौलिया बुद्धेश्वर भगत ने पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा किया है। उसने बताया है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में सेटिंग कराने के लिए सबसे पहले उससे रांची का धुर्वा निवासी संतोष जुड़ा और फिर एक-एक कर 24 संपर्क में आ गए।

बुद्धेश्वर भगत से संतोष अक्सर कहता था कि काफी कोशिश के बावजूद उसकी नौकरी नहीं लग रही है। कोई परीक्षा में सेटिंग कराने वाला मिलेगा तो बताएंगे। संतोष के बाद उसके माध्यम से धनबाद का कपिल व रांची के बरियातू का रमेश बुद्धेश्वर के संपर्क में आया।

तीनों ही अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए कुल 24 अभ्यर्थियों का नाम दिए थे। इन सभी के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र को गारंटी के तौर पर बुद्धेश्वर के नामकुम स्थित कार्यालय में पहुंचाया गया था। इन सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को बुद्धेश्वर ने अभय तिवारी के कहे अनुसार अभय तिवारी के साले सौरभ पांडेय व बिजनेस पार्टनर उमेश कुमार को दिया था।

परीक्षा के तीन दिन पहले कुल 24 अभ्यर्थियों में से 11 ने कुल 1.10 करोड़ रुपये दिए थे। उसने यह राशि दो बार में सौरभ व उमेश तक पहुंचा दिया था। बाकी 13 अभ्यर्थियों की ओर से पैसा नहीं मिलने पर उनका शैक्षणिक प्रमाण पत्र वापस कर दिया था।

उक्त परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों में कपिल कुमार महतो व संतोष कुमार शामिल थे। ये अभ्यर्थी व एजेंट दोनों भूमिका में थे। वहीं एजेंट कपिल की तरफ वह स्वयं भी था और उसके अलावा दिलीप कुमार राणा, ओम प्रकाश राणा व पवन कुमार मुंडा शामिल थे। रांची के बरियातू निवासी एजेंट रमेश ने राकी सचिन लकड़ा, मनोज कुमार, रोशन केरकेट्टा व उमाकांत उरांव का नाम दिया था।

पीटी के बाद मुख्य परीक्षा के पहले ली जानी थी 50 प्रतिशत राशि
बिचौलिया बुद्धेश्वर भगत ने सीआइडी को बताया कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में उसने 11 अभ्यर्थियों 1.10 करोड़ रुपये ले लिया था। प्रारंभिक परीक्षा के बाद व मुख्य परीक्षा से ठीक पहले कुल तय राशि की 50 प्रतिशत राशि अभ्यर्थियों से ली जानी थी।

इससे पहले ही जालसाजी का भंडाफोड़ हो गया। जानकारी मिली कि जेपीएससी परीक्षा में अनियमितता की जांच की जिम्मेदारी सीआइडी ने ले ली है। इसके बाद ही अभ्यर्थियों ने मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र वापस करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

इसके बाद ही बुद्धेश्वर ने अभय तिवारी के साले सौरभ कुमार व उमेश कुमार से संपर्क किया। एक अगस्त को उमेश बनारस से बस से रांची आया, जिसे बुद्धेश्वर व सौरभ ने उसे अपने साथ लिया और सभी रामगढ़ चले गए।

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