उत्तराखंडराज्य

राज्यसभा चुनाव: दिनेश आर्य ने भरा नामांकन, CM धामी रहे मौजूद

देहरादून 
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंगलवार को विधानसभा, देहरादून में राज्यसभा सीट के लिए प्रत्याशी दिनेश आर्य के नामांकन के अवसर पर उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने दिनेश आर्य को नामांकन के अवसर पर शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट सहित मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण उपस्थित रहे।

 नामांकन के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत मंत्री, विधायक भी मौजूद रहे।आर्य के नामांकन के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पार्टी ने एक सामान्य कार्यकर्ता को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। पार्टी हर वर्ग का ख्याल रखती है और इस बार राज्यसभा उम्मीदवार में भी यही देखने को मिला है।

साथ ही कांग्रेस की जातिवादी राजनीति पर भी सीएम धामी ने हमला बोला। उधर, निर्वाचन अधिकारी हेम पंत ने बताया कि नामांकन की प्रकिया के आखिर दिन अभी तक तीन नामांकन पत्रों की ब्रिकी हुई है। इनमे से केवल भाजपा उम्मीदवार ने ही नामांकन कराया है।

नॉमिनेशन से पहले दिनेश आर्य सोमवार को देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय पहुंचे थे। प्रत्याशी घोषित होने के बाद पहली बार प्रदेश मुख्यालय पहुंचे आर्य का पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने भी उन्हें गले लगाकर बधाई दी।

आर्य नैनीताल क्षेत्र से आने वाले वरिष्ठ दलित नेता हैं। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा की एक सीट के लिए अपना प्रत्याशी बनाया है। पार्टी के मुताबिक उनके चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ संगठन और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखा गया है। अब नॉमिनेशन दाखिल होने के बाद चुनाव की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

नामांकन में CM धामी पूरी टीम के साथ मौजूद रहे
दिनेश आर्य के नॉमिनेशन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी पूरी टीम के साथ विधानसभा पहुंचे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री और पार्टी विधायक भी मौजूद रहे।

प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि भाजपा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम करती है। समाज के सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए दिनेश आर्य को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया गया है।

आर्य के चयन को पार्टी के भीतर सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। वह लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं और अनुसूचित जाति मोर्चे में जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

11 बजे शुभ मुहूर्त में भरा नॉमिनेशन
भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार के मुताबिक दिनेश आर्य ने मंगलवार सुबह करीब 11 बजे नॉमिनेशन दाखिल किया। उन्होंने बताया कि प्रत्याशी के शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए यह समय तय किया गया था।

पार्टी की ओर से नॉमिनेशन से जुड़ी सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं। नामांकन के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे।

राज्यसभा चुनाव का नंबर गेम BJP के पक्ष में

उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 विधायक हैं। भाजपा के पास 47 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 19 विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट के लिए 36 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत है।इस हिसाब से भाजपा के पास जरूरी संख्या से 11 विधायक ज्यादा हैं। इसलिए भाजपा के पास अपने प्रत्याशी के लिए पर्याप्त संख्या बल है।

राज्यसभा चुनाव में विधायक उम्मीदवारों को अपनी पसंद के क्रम में वरीयता देते हैं। एक सीट के लिए जरूरी वोट हासिल करने वाला उम्मीदवार निर्वाचित होता है। अगर एक से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो वोटों की गिनती वरीयता के आधार पर होती है।

BJP ने दिग्गजों के बजाय संगठन के पुराने चेहरे को चुना
दिनेश आर्य का राज्यसभा टिकट मिलने के बाद भाजपा के भीतर उनके चयन को लेकर चर्चा हुई। आर्य लंबे समय से संगठन में काम करते रहे हैं। ABVP से शुरुआत करने के बाद उन्होंने भाजपा में जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां संभालीं।

वह भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव और पंजाब प्रभारी भी रहे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ जनसंपर्क अधिकारी के तौर पर काम करने का अनुभव भी उनके राजनीतिक सफर का हिस्सा रहा है।

उनके चयन को कुमाऊं क्षेत्र और सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी देखा जा रहा है।

कांग्रेस क्यों नहीं उतार रही कैंडिडेट?
कांग्रेस के पास उत्तराखंड विधानसभा में 19 विधायक हैं, जबकि राज्यसभा की एक सीट के लिए 36 प्रथम वरीयता वोट चाहिए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ने का मतलब हार तय होने के बावजूद मैदान में उतरना होता। विधानसभा चुनाव से पहले एक और हार का ठप्पा न लगे, इसलिए पार्टी ने कैंडिडेट नहीं उतारने का फैसला किया। इससे पहले 2020 में भाजपा के नरेश बंसल भी निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे थे।

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