उत्तराखंडराज्य

कैंची धाम में जाम से हाहाकार, घंटों थमे रहे वाहन; भूखे-प्यासे गाड़ियों में फंसे हजारों श्रद्धालु

नैनीताल 
बाबा नींब करौरी आश्रम कैंची धाम में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने से सुबह से ही यातायात व्यवस्था भी ध्वस्त हो गई। हाईवे पर आवाजाही करने वाले यात्रियों व पर्यटकों को तमाम परेशानियों से जूझना पड़ा।नैनीताल व अल्मोड़ा जनपद की सीमा पर मालवाहक वाहनों के साथ ही यात्री व पर्यटक वाहन तथा बाईक सवारों को भी रोक लिया गया।

अव्यवस्था से परेशान लोगों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आपा खोई एक महिला ने पुलिस को खूब खरी भी सुनाई। यातायात व्यवस्था के धराशाही होने से लोग घंटों तक भूखे प्यासे वाहनों में कैद रहे।

जिम्मेदारों को कोसते रहे
शनिवार को हाईवे पर आवाजाही करने वाले लोग जिम्मेदारों को कोसते रहे। सुबह से ही जाम की स्थिति वाहनों के पहिए थमे रहे। कई किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगी रहे। वाहनों के अंदर भूखे प्यासे बैठे यात्रियों को काफी परेशानियों से जूझना पड़ा।

कई लोगों ने आधे रास्ते से ही वापस लौटने में भलाई समझी। अव्यवस्था से परेशान लोगों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पहाड़ से हल्द्वानी की ओर रवाना हुईं महिला ने खैरना क्षेत्र में रोक लिए जाने से पुलिस को आड़े हाथ लिया।

आरोप लगाया की बुजुर्ग व बच्चे वाहनों में बैठे हुए हैं पर जिम्मेदारों को कुछ लेना देना नहीं है। लोगों के समझाने के बाद बामुश्किल महिला शांत हुई। जाम से परेशान लोगों ने यातायात व्यवस्था के धराशाही होने को पुलिस प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहरा गहरी नाराजगी जताई। इधर कई वाहनों के सैनिटोरियम से रातीघाट होते हुए आवाजाही करने से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया। यात्री व पर्यटक जान जोखिम में डाल आवाजाही को मजबूर रहे।

पर्यटकों की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने पहले से ही 2 से 4 अक्टूबर तक विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया था. इस व्यवस्था के तहत बाहरी वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर रोकने और वहां से कैंची धाम के लिए शटल सेवा संचालित करने की योजना बनाई गई थी. इसके अलावा भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने की व्यवस्था भी की गई थी. इस ट्रैफिक प्लान का उद्देश्य शहर और आसपास के प्रमुख पर्यटन मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करना था. शुरुआत में निर्धारित पार्किंग और शटल सेवा के जरिए यातायात को नियंत्रित करने की कोशिश की गई, लेकिन जैसे-जैसे पर्यटकों की संख्या बढ़ती गई, व्यवस्थाओं पर दबाव भी बढ़ने लगा. कैंची धाम और भवाली क्षेत्र में पार्किंग की उपलब्ध जगह कम पड़ने लगी. निर्धारित स्थलों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से पार्किंग व्यवस्था प्रभावित हुई और कई पर्यटकों के वाहन मुख्य मार्गों पर ही पहुंचने लगे. इससे पहले से धीमी चल रही यातायात व्यवस्था और ज्यादा प्रभावित हो गई। 

विशेष ट्रैफिक प्लान लागू होने के बावजूद लंबी कतारें लगने से व्यवस्थाओं की क्षमता और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि जाम के दौरान ट्रैफिक प्लान के किन विशेष प्रावधानों को लागू करने में सबसे ज्यादा दिक्कत आई। 

नैनीताल शहर में भी घंटों रेंगते रहे वाहन, मालरोड पर बढ़ा दबाव
भवाली और कैंची धाम के आसपास लगा जाम नैनीताल शहर तक भी पहुंच गया. दोपहर बाद हल्द्वानी रोड, भवाली रोड और कालाढूंगी रोड पर वाहनों का दबाव बढ़ने लगा. हल्द्वानी रोड पर हनुमानगढ़ी से रूसी बाईपास तक वाहन बेहद धीमी गति से आगे बढ़ते नजर आए. शहर के अंदर भी हालात सामान्य नहीं रहे. मालरोड, जू रोड और शेरवानी मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं. प्रमुख पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले रास्तों पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. नैनीताल में रहने वाले लोगों के लिए रोजमर्रा के काम से घर से निकलना भी मुश्किल हो गया. बाजार, कार्यालय और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में सामान्य से कहीं अधिक समय लगा. पर्यटकों की बड़ी संख्या से जहां पर्यटन कारोबार को फायदा मिला, वहीं शहर के भीतर यातायात की समस्या ने स्थानीय नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दीं। 

जाम के बीच नैनी झील, चिड़ियाघर और स्नो व्यू में उमड़ी भीड़
सड़कों पर घंटों जाम के बावजूद पर्यटकों के उत्साह में कमी नहीं दिखाई दी. नैनी झील, नैनीताल चिड़ियाघर, स्नो व्यू और हिमालय दर्शन जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की अच्छी-खासी भीड़ रही. पर्यटक परिवार के साथ झील के किनारे घूमते, नौकायन करते और पहाड़ों के खूबसूरत नजारों का आनंद लेते नजर आए. लंबे वीकेंड की छुट्टियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने उत्तराखंड के पहाड़ी पर्यटन स्थलों का रुख किया. नैनीताल की खूबसूरत वादियां, ठंडा मौसम, झील और आसपास के धार्मिक स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे. कैंची धाम भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बना रहा. बाबा नीम करौली के आश्रम में दर्शन के लिए आने वाले लोगों की आवाजाही ने भवाली क्षेत्र के यातायात दबाव को और बढ़ाया. धार्मिक पर्यटन और प्राकृतिक पर्यटन का यह मेल नैनीताल क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की एक प्रमुख वजह रहा। 

होटल और रेस्टोरेंट कारोबार में रौनक, स्थानीय लोगों की बढ़ी परेशानी
पर्यटकों की भारी आमद का सीधा असर नैनीताल के पर्यटन कारोबार पर देखने को मिला. होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े कारोबारियों के लिए लंबा वीकेंड व्यस्त रहा. बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से बाजारों और पर्यटन स्थलों के आसपास आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं. दूसरी तरफ स्थानीय लोगों के लिए यही भीड़ परेशानी का कारण बन गई. सड़कों पर वाहनों की अधिकता, पार्किंग की सीमित जगह और लगातार लगते जाम ने शहर की सामान्य रफ्तार को प्रभावित किया. पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को भी यातायात में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. पहाड़ी पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ ही बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. नैनीताल जैसे शहरों में सीमित सड़क नेटवर्क और पार्किंग क्षमता के कारण अचानक बढ़ने वाली भीड़ को संभालना आसान नहीं है। 

पर्यटकों की भीड़ ने फिर उजागर की पहाड़ों में ट्रैफिक प्रबंधन की चुनौती
नैनीताल में लंबे वीकेंड के दौरान पैदा हुए जाम ने एक बार फिर पहाड़ों में पर्यटन और यातायात प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को सामने ला दिया है. पर्यटकों की बढ़ती संख्या जहां स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम है, वहीं सीमित सड़कें, पार्किंग की कमी और एक साथ बड़ी संख्या में निजी वाहनों का पहुंचना यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहा है. ऐसे में पार्किंग स्थलों की क्षमता बढ़ाने, शटल सेवाओं को प्रभावी बनाने, प्रमुख चौराहों पर यातायात नियंत्रण और पर्यटकों को पहले से ट्रैफिक की जानकारी देने जैसे उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं. इसके साथ ही कैंची धाम, भवाली और नैनीताल के बीच यातायात के दबाव को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की रणनीति भी उपयोगी साबित हो सकती है. गांधी जयंती के लंबे वीकेंड पर नैनीताल में उमड़ी करीब 12 हजार सैलानियों की भीड़ ने पर्यटन कारोबार को तो रफ्तार दी, लेकिन कई किलोमीटर लंबे जाम ने यह भी दिखा दिया कि पहाड़ों में बढ़ते पर्यटन दबाव के अनुरूप यातायात व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की जरूरत है। 

मसूरी में जाम में फंसी एंबुलेंस
वीकेंड पर पर्यटकों की भारी आमद ने पहाड़ों की रानी मसूरी की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह पटरी से उतार दिया। शुक्रवार से ही शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ने के बाद शनिवार को हालात और बिगड़ गए। माल रोड के भगत सिंह चौक, लाइब्रेरी चौक और किंग्रेग समेत कई स्थानों पर घंटों जाम लगा रहा। जाम में एंबुलेंस के साथ कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी भी फंसे रहे। सबसे गंभीर स्थिति भगत सिंह चौक के पास देखने को मिली, जहां जाम में एंबुलेंस फंस गई।

कैंची में घंटों फंसे रहे श्रद्धालु
वीकेंड के चलते कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही के चलते शुक्रवार को भीमताल से लेकर कैंची धाम तक घंटों जाम का सामना करना पड़ा। कैंची धाम में जाम लगने से सबसे अधिक परेशानियों का सामना अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, रानीखेत, धारचूला, बागेश्वर और हल्द्वानी की ओर आने और जाने वाले यात्रियों और सैलानियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोगों को तीन घंटे से अधिक जाम का सामना पड़ा।

ऋषिकेश में घंटों में पूरा हुआ मिनटाें का सफर
सुपर वीकेंड पर ऋषिकेश में भी भारी जाम लग गया। नेपालीफार्म से नीरगड्ड पहुंचने में ढाई घंटे लगे। वाहनों की भीड़ के सामने पुलिस की व्यवस्थाएं कम पड़ गई। पर्वतीय क्षेत्रों से आ रहे वाहनों को ब्रह्मपुरी से लक्ष्मणझूला होते हुए पशुलोक बैराज भेजा। 

ज्योतिर्मठ में सात किमी लंबा जाम
चारधाम यात्रा बढ़ने के साथ ही ज्योतिर्मठ क्षेत्र में यातायात व्यवस्था भी चरमरा गई है। ज्योतिर्मठ से विष्णुप्रयाग तक वाहन सुबह से जाम में फंसते रहे। अपराह्न लगे जाम से करीब सात किमी तक वाहनों की कतार लगी रही।बदरीनाथ धाम में यात्रियों की संख्या में काफी इजाफा हो रहा है। साथ ही हेमकुंड साहिब की यात्रा भी अंतिम चरण में है, इसके चलते दोनों जगह यात्रियों की संख्या काफी बढ़ गई है। 

 

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